पालघर, महाराष्ट्र, 28 फरवरी 2025: पालघर पुलिस ने साइबर अपराध के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह अमेरिका सहित विदेशों में रहने वाले नागरिकों को फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठग रहा था। पुलिस ने 28 फरवरी 2025 को छापेमारी कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से कुल 492,000 रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। जब्त सामान में 8 लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन, 8 हेडफोन, 1 टीपी-लिंक राउटर और 1 एयरटेल डॉन्गल शामिल हैं।

पालघर पुलिस अधीक्षक श्री यतिश देशमुख को गुप्त सूचना मिली थी कि पालघर पश्चिम क्षेत्र की एक इमारत में अनधिकृत बोगस कॉल सेंटर चल रहा है, जहां विदेशी नागरिकों को फंसाकर आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय गुंडा शाखा को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
28 फरवरी 2025 की रात 12:10 बजे क्राईम ब्रांच ने फ्लैट नंबर 303 में छापा मारा। मौके पर मौजूद 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम भरत लोकुलालवानी, रोहीत राजेंद्र निंबालकर,रोहीत मिलिंद झोले,अमरदीप अंजन गिल, सागर बलदेव पाटडिया है।

जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी भरत लोकुलालवानी के पास अमेरिकी नागरिकों के मोबाइल नंबर, नाम और अन्य व्यक्तिगत जानकारी का बड़ा डेटाबेस था। इसी डेटा का इस्तेमाल कर गिरोह अमेरिका में रहने वाले लोगों को फोन करता था। आरोपी खुद को ऐपल कंपनी का प्रतिनिधि बताते और फर्जी तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर पीड़ितों को Lowes, Apple, Nike या Amazon गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए मजबूर करते। प्रत्येक गिफ्ट कार्ड की कीमत 500 अमेरिकी डॉलर से लेकर 8,000 अमेरिकी डॉलर तक होती थी।
गिफ्ट कार्ड खरीदने के बाद उसकी कोड आरोपीयों को भेज दिया जाता था। फिर आरोपी इन कोड्स को USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। इस तरह वे आसानी से पैसे निकाल लेते थे और आगे ठगी के लिए इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने पाया कि गिरोह ने इस तरह लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी की है।
इस मामले में पालघर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(2), 319(2), 334(3), 338(2), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66(डी), 66(सी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी 5 आरोपियों को 28 फरवरी 2025 को न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने उनकी पुलिस रिमांड 2 मार्च 2025 तक मंजूर की।
पालघर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख का संदेश देती है। ऐसे फर्जी कॉल सेंटर मुख्य रूप से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते हैं और युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर शामिल करते हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण साझा न करें और गिफ्ट कार्ड कभी न खरीदें। यदि ऐसी कोई कॉल आए तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरे को भी उजागर करती है। पालघर पुलिस ने आगे की जांच तेज कर दी है और गिरोह के अन्य सदस्यों तथा डेटा स्रोत की तलाश जारी रखी है। साइबर अपराध रोकने के लिए जन जागरूकता और पुलिस की सतर्कता दोनों जरूरी हैं।



