मुंबई, 20 मार्च 2026 – रणवीर सिंह स्टारर स्पाई एक्शन थ्रिलर धुरंधर: द रिवेंज (धुरंधर 2) ने रिलीज के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। आदित्य धर द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म 19 मार्च 2026 को थिएटर्स में रिलीज हुई। फिल्म को लेकर दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है, वहीं यह फिल्म कुछ विवादों में घिर गया है।
फिल्म धुरंधर के सीक्वल के रूप में जस्किरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) की कहानी को आगे बढ़ाती है, जो हमजा अली मज़ारी के नाम से पाकिस्तान के कराची के अंडरवर्ल्ड में गहराई तक घुसपैठ करता है। वह “शेर-ए-बलोच” बनकर ISI और अपराध सिंडिकेट्स के खिलाफ बदला लेता है, खासकर 26/11 हमलों से जुड़े खतरों का सामना करते हुए।
फिल्म में राजनीतिक कनेक्शन, नोटबंदी जैसे मुद्दों की झलक, और भारत की बदलती रणनीति को दिखाया गया है। रनटाइम लगभग 3 घंटे 49 मिनट है, जो बड़े स्केल एक्शन, ट्विस्ट्स और इमोशनल मोमेंट्स से भरा है।
रणवीर सिंह और अर्जुन रामपाल कि परफॉर्मेंस लाजबाव है, यह फिल्म इन दोनों कलाकारों के अब तक के सबसे बढ़िया एक्टिंग मानी जा रही है। रनवीर सिंह का किरदार इतना खुंखार और भयंकर है लेकिन अपने एक्टिंग के दम पर उन्होंने अपनी मासुमियत को भी गजब तरीके निखारा है।
इस फिल्म में कई यैसे पल आते हैं, जो आपकी सांसे तेज हो जाती है। भारत और पाकिस्तान में चल रही राजनीतिक गतिविधियों को भी बहुत हद तक सत्यता के नजदीक रखने कि कोशिश कि गई है। लेकिन अब यही भारत में विवादों का जड़ बन गई है। विपक्ष के कई सांसद और बड़े नेताओं ने इस फिल्म को घिर्ना से भरा, प्रोपगेंडा, और भारत हिंदू मुस्लिम के भाईचारा के लिए खतरा बताया है।
पेटिकोट पत्रकारों कि मंडली न्यूज़लॉन्ड्री ने आदित्य धर की फिल्म की कड़ी आलोचना की है। समीक्षक सोम्या राजेंद्रन ने लिखा है कि फिल्म में कोई भी शरीर का अंग बिना क्षति के नहीं बचा है।
पहले भाग की तुलना में यह सीक्वल और अधिक गुस्से वाला, तेज़ आवाज़ वाला तथा संदेश में स्पष्ट रूप से कट्टर है।
वहीं द वायर ने धुरंधर: द रिवेंज को राष्ट्र को गुमराह करने वाली पैंडरिंग का मास्टरस्ट्रोक बताया है।
समीक्षा में कहा गया है कि यह फिल्म नरेंद्र मोदी के लिए एक पीआर जॉब है, जिसमें नोटबंदी को ‘मास्टरस्ट्रोक’ के रूप में सराहा गया है।
फिल्म को हाइपर-नेशनलिस्टिक, सत्ता-समर्थक दर्शकों के लिए बनाया गया प्रचार बताया गया है, जो टीवी न्यूज की तरह पक्षपाती और बदसूरत है।

अब दुसरा पक्ष यह सवाल उठा रहा है कि आखिर भारत को जीतता दिखाने वाली फिल्मों से इन्हें हर बार दिक्कत क्यों हो रही हैं?
हालांकि आप अगर इस फिल्म को देखने का विचार बना रहे हैं तो कलेजा मजबूत करके जाएं।



