बोईसर (तारापुर), 23 मार्च 2026: महाराष्ट्र के पालघर जिले के बोईसर-तारापुर औद्योगिक क्षेत्र एक बार फिर भोपाल गैस त्रासदी की याद दिला रहा है। जहां कुछ महीने पहले ही एक गैस रिसाव में 5 मजदूरों की मौत हो चुकी थी, वहीं आज बुधवार को आरती फार्मा लैब में फिर से गैस रिसाव की घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत मचा दी। इस हादसे में करीब 20 मजदूर गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आंखों के सामने खुली आंखों से मौत का खेल देख रहे मजदूरों का कहना है कि “हर महीने कुछ न कुछ हो रहा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।” घटना के बाद मजदूरों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कई की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

यह पहली घटना नहीं है। मात्र कुछ महीने पहले इसी बोईसर-तारापुर इंडस्ट्रियल एरिया में एक अन्य केमिकल प्लांट में गैस रिसाव के कारण 5 मजदूरों की मौत हो चुकी थी। उसके बाद भी प्रशासन ने केवल “जांच” का ढिंढोरा पीटा था, लेकिन नतीजा शून्य। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बोईसर अगला भोपाल बनने जा रहा है?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिम्मेदार संस्थान और अधिकारी सिर्फ अपनी जेब गर्म करने में लगे हुए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, कुछ पत्रकारों और सरकारी कर्मचारियों का एक पूरा “रैकेट” चल रहा है, जो इन फैक्टरियों के मालिकों के साथ मिलकर हजारों मजदूरों की जान को खतरे में डाल रहा है। ये लोग सेफ्टी ऑडिट के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं और रिपोर्ट में सब कुछ “ठीक-ठाक” लिख देते हैं।
सेफ्टी ऑडिट करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर हर साल सेफ्टी ऑडिट हो रहा है, सब कुछ कानूनी रूप से सही पाया जा रहा है, तो फिर बार-बार गैस रिसाव क्यों हो रहा है? क्यों मजदूरों की जान जा रही है? क्यों हर हादसे के बाद सिर्फ “कार्रवाई के आश्वासन” दिए जाते हैं और फिर मामला ठंडा पड़ जाता है?
बोईसर-तारापुर इंडस्ट्रियल एरिया देश के सबसे बड़े फार्मा और केमिकल हब में से एक है। यहां हजारों मजदूर रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। अगर अभी भी जिम्मेदार संस्थान नहीं जागे तो एक दिन यह क्षेत्र “भोपाल 2.0” के रूप में इतिहास में दर्ज हो जाएगा।



