UGC नए नियम: सवर्ण छात्र अब ‘ऑटोमैटिक दोषी’?

मुंबई, 16 जनवरी 2026: केंद्र की भाजपा (BJP) सरकार पर सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी या सवर्ण) को ‘शोषित’ करने के लिए नया खेल रचने का आरोप।

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पहले SC/ST ACT में संशोधन किया उस से जनरल कैटिगरी का उत्पीड़न बढ़ चुकी है। खासकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 के बाद।  SC/ST/OBC और अन्य वंचित वर्गों को भेदभाव से बचाने के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों और फैकल्टी को ‘टारगेट’ करते हैं, जिससे उनके अवसर छीने जा रहे हैं और ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ को बढ़ावा मिल रहा है।

दरअसल UGC द्वारा यह काम सरकार के इशारे पर ही हो रहा है। UGC का कहना है कि यह हम दलित, ओबीसी और महिलाओं के साथ होने वाली भेदभाव से बचने हेतु कर रहे हैं। इसके तहत हर उच्च शिक्षा संस्थान में एक कमिटी होगी जो दलितों के ऊपर हो रहे शोषण पर नजर रखेंगी और कार्रवाई करेंगी। लेकिन सरकारी डेटा के अनुसार जब देश में sc/st ACT के तहत दर्ज होने वाली 90% केस फर्जी हो वहां क्या इस तरह से एक नई गाइडलाइंस कितनी उचित है।

फर्जी SC/ST केश पर पुरी रिपोर्ट

https://neopolitico.com/asia/only-0-67-of-sc-st-act-cases-found-true-in-court-trials-government-data-says/

कमाल कि बात यह है कि इस गाइडलाइंस में UGC ने झुठे आरोप लगाने वाले पर क्या कार्रवाई होगी यह नहीं बताई है। अब अगर किसी छात्र पर इस तरह के झुठे आरोप लग जाता है तो वह छात्र इस पुरे जांच प्रक्रिया के दौरान जिस मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ेगा उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या झुठे आरोप लगाने वाले पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? लेकिन यैसा लगता है कि सरकार जनरल कैटिगरी के बच्चों को प्रताड़ित करने का पुरा मन बना चुकी है।

देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में खुलेआम ब्राह्मण, बनिया, और राजपूतों के खिलाफ उन्मादी नारे लगाए जा रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। जेएनयू जैसे संस्थान में ब्राह्मणों कि हत्या के नारे, “तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जुते चार” जैसे नारे आम होते जा रहे हैं। लेकिन यह जनरल कैटिगरी के साथ शोषण नहीं माना जाता है।

सरकार का यह फैसला पुर्नतह जनरल कैटिगरी के बच्चों के लिए दमनकारी है। जातिवाद का यह जहर भारतीय युनिवर्सिटी में ना सिर्फ विश्व गुरु बनने के खोखले दावे कि पोल खोलता है बल्कि भाजपा के जातिवादी मानसिकता को भी उजागर करता है।

भाजपा अब अपने नई वोट बैंक कि तलाश में जनरल कैटिगरी को बली का बकरा बनाने पर तुली हुई है। लेकिन शोशल मिडिया पर इस मुद्दे पर बवाल मचा हुआ है।

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