नई दिल्ली, 9 जनवरी 2026 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की सहस्राब्दी लचीलता को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताते हुए सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ पर देशवासियों को बधाई दी। यह पर्व 1026 में महमूद गजनवी द्वारा मंदिर पर किए गए पहले हमले के ठीक 1000 वर्ष पूर्ण होने का स्मरण कराता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट की साथ पीएम मोदी ने लिखा:
“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व राष्ट्रीय गौरव की भावना को समेटे हुए है। सोमनाथ पर हमलों की श्रृंखला, जो एक हजार वर्ष पूर्व 1026 में शुरू हुई थी, भारत की आत्मा, आस्था या सभ्यतागत संकल्प को तोड़ नहीं सकी। सोमनाथ के हमलावर इतिहास के पाद लेख बनकर रह गए, जबकि सोमनाथ आज भी ऊंचा खड़ा है! जय सोमनाथ।”
ऐतिहासिक रूप से, जनवरी 1026 में महमूद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर भयंकर हमला किया था, जहां धन लूटा गया और ज्योतिर्लिंग को क्षति पहुंचाई गई। इसके बावजूद भारतीय शासकों और भक्तों ने मंदिर को बार-बार पुनर्निर्मित किया। स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 1951 में इसका उद्घाटन हुआ। इस वर्ष 2026 में उस भव्य समारोह की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (1026-2026) वर्ष भर चलने वाला आयोजन है, जिसमें 8 से 11 जनवरी तक विशेष कार्यक्रम हो रहे हैं। इनमें आध्यात्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ऐतिहासिक रक्षकों को श्रद्धांजलि शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के इस पोस्ट के बाद से ही वामपंथी गिरोह में खलबली मची हुई है। वामपंथीयों के साथ होना यह बहुत ही स्वाभाविक है, किव कि जो वामपंथी सुबह उठते ही एक बिड़ी पिने के बाद मनुवाद मुर्दाबाद, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, और मोदी कि कब्र खोदने कि बात करता हो वह यह कैसे बर्दाश्त कर सकता है कि सरकार हिंदू सभ्यता कि बात करें। वैसे तो देश में वामपंथी विचारधारा अपनी अस्तित्व कि लड़ाई लड़ रही है लेकिन वामपंथनों कि छाती का दुध है कि सुखने का नाम नहीं ले रही हैं।
लेकिन गौरतलब बात यह है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर आज भी आस्था, पुनर्निर्माण और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बना हुआ है। जय सोमनाथ!




