26 जनवरी 2026 — गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों 2026 की सूची में झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सार्वजनिक कार्य (Public Affairs) के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया है। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी है, खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 2004 में की गई आलोचना को लेकर, जहां पार्टी ने सोरेन को “हत्या का आरोपी” और “भगोड़ा” बताया था। साथ ही, इस संदर्भ में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को 2023 में दिए गए पद्म विभूषण का उदाहरण भी उठाया जा रहा है, जो भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही हुआ था।

इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों में कुल 131 नाम शामिल हैं, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री हैं।
शिबू सोरेन के जीवन में कई विवादास्पद मामले जुड़े रहे। 1975 के चिरुड़ीह नरसंहार (जामताड़ा, तत्कालीन बिहार) में उनकी भूमिका का आरोप लगा, जहां 11 लोगों की हत्या हुई थी, जिनमें अधिकांश अल्पसंख्यक समुदाय के थे। 1974 के एक अन्य हत्या मामले (गिरिडीह) और 1994 में उनके सचिव शशि नाथ झा के अपहरण-हत्या मामले में भी उनका नाम आया। 2006 में दिल्ली की एक अदालत ने झा हत्या मामले में उन्हें दोषी ठहराया था, लेकिन 2007 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। चिरुड़ीह मामले में 2008 में जामताड़ा कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी किया।
यह सम्मान इसलिए विवादास्पद है क्योंकि 2004 में, जब सोरेन यूपीए सरकार में मंत्री बने, तो भाजपा ने तीखी आलोचना की थी। 24 जुलाई 2004 को भाजपा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें सोरेन को “हत्या के मामलों में आरोपी” और “56 वर्षों में पहला कैबिनेट मंत्री जो गिरफ्तारी से बचने के लिए अंडरग्राउंड चला गया” बताया गया। ज्ञापन में चिरुड़ीह नरसंहार, 1974 की हत्या और अन्य मामलों का जिक्र था। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और अन्य ने कहा था कि ऐसे व्यक्ति को मंत्री बनाना “लोकतंत्र की हत्या” है।

इस बहस में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का उदाहरण भी उठाया जा रहा है। मुलायम को 2023 में मोदी सरकार ने ही मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। हालांकि, 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने के आदेश दिया था, जिसे भाजपा और हिंदुत्व संगठन “राम भक्तों की हत्या” बताते रहे हैं। भाजपा ने लंबे समय तक मुलायम को “मुल्ला मुलायम” कहकर आलोचना की, लेकिन 2023 के पद्म पुरस्कार में उन्हें सम्मानित कर दिया।
भाजपा के इस ट्रेंड को देखते हुए यह कहा जा सकता है, कि कोर्ट से घोषित अपराधी और घपलेबाज लालू प्रसाद यादव को भी इस तरह का कोई पुरस्कार दे सकती है। लेकिन यैसे भ्रष्ट हत्यारें लोगों को पद्म भूषण से सम्मानित करना पद्म भूषण कि गरिमा को खत्म करना है। यैसे हि चलता रहा तो पद्म भूषण का कद गली-मोहल्लों में मिलने वाले क्रिकेट के मैडल जैसा हो जाएगा।



