नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025: भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया लंबे समय से विवादों में घिरी हुई है। लाखों यात्री हर दिन सुबह 10 या 11 बजे IRCTC वेबसाइट या ऐप पर तत्काल टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ ही सेकंड या मिनट में सभी सीटें बिक जाती हैं।

तत्काल बुकिंग शुरू होते ही हजारों टिकटें सेकंडों में बुक हो जाना कोई सामान्य बात नहीं है। जांच से पता चला है कि टिकट दलाल ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर (बॉट्स) का इस्तेमाल करते हैं, जो यात्री डिटेल्स पहले से भरकर रखते हैं और बुकिंग विंडो खुलते ही एक क्लिक में सैकड़ों टिकटें बुक कर लेते हैं। टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर सक्रिय रैकेट्स में ऐसे बॉट्स बेचे जा रहे हैं।
- ये सॉफ्टवेयर यात्रियों का विवरण और मोबाइल नंबर पहले से ही फीड कर लेते हैं।
- कैप्चा बाईपास: आधुनिक अवैध सॉफ्टवेयर आईआरसीटीसी के सुरक्षा घेरे (कैप्चा) को पलक झपकते ही पढ़ लेते हैं।
- सुपर-फास्ट पेमेंट: ये सीधे बैंक के गेटवे के साथ सिंक होकर बिना किसी देरी के पेमेंट प्रोसेस कर देते हैं। जब तक आपका सर्वर ‘लोड’ ले रहा होता है, तब तक हजारों टिकटें ब्लैक मार्केट में पहुंच चुकी होती हैं।
ये दलाल VPS (वर्चुअल प्राइवेट सर्वर) से IP बदलकर IRCTC की एंटी-बॉट सिस्टम को चकमा देते हैं। नतीजा यह कि आम यात्री पेमेंट प्रोसेसिंग या साइट हैंग होने की समस्या से जूझते रहते हैं, जबकि दलालों के पास कन्फर्म टिकटें पहुंच जाती हैं।





