@reportcard : देश की जीवनरेखा माने जाने वाली भारतीय रेलवे में यात्रियों के साथ टिकट चेकिंग के नाम पर दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाओं ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में एक घटना सामने आई है जिसने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रेलवे ने अपने कर्मचारियों को कानून हाथ में लेने की खुली छूट दे रखी है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें यह साफ दिख रहा है की टिकट चेकर एक यात्री को सिर्फ टिकट न होने की वजह से उसके कॉलर को पकड़ता है उसे अभद्र भाषा में बातचीत करता है और शारीरिक हिंसा भी करता नजर आ रहा है। टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) द्वारा नियम और कानून को दरकिनार करते हुए गुंडागर्दी की जा रही है। यदि किसी यात्री के पास टिकट नहीं भी है, तो कर्मचारी को केवल जुर्माना लगाने या वैध कानूनी कार्यवाही करने का अधिकार है, न कि यात्री के साथ शारीरिक हिंसा करने का।
यह पहली घटना नहीं है। कैटरिंग और टिकट को लेकर पहले भी मारपीट के कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ शिकायत करने पर यात्री की पिटाई की गई थी। जब भी ऐसी घटनाएँ सुर्खियों में आती हैं, रेलवे आनन -फानन में ‘कड़ी कार्रवाई’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का बयान जारी करता है। हालाँकि, इन लगातार हो रही घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि रेलवे की कार्रवाई पर्याप्त ठोस नहीं है। सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में दोषी कर्मचारियों को केवल निलंबित कर दिया जाता है, जो एक अस्थायी कदम है। यात्रियों का मानना है कि यदि दोषी कर्मचारियों पर सेवा समाप्ति जैसी नजीर बनने वाली कठोर कार्रवाई की जाती, तो अन्य कर्मचारियों में भय उत्पन्न होता और ऐसी घटनाओं पर रोक लगती।





