नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025 (@reportcard): देशभर में इंडिगो एयरलाइंस की 1,000 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिलेशन से यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मशहूर ‘हवाई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति हवाई जहाज में सफर करे, यही मेरा सपना है’ वाली बात पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह सपना सिर्फ चुनावी नारे साबित हो गया? क्या मोदी सरकार ने हवाई यात्रा को सुलभ बनाने के बजाय, इंडिगो जैसी एकाधिकार वाली कंपनी को इतना मजबूत कर दिया कि वह पूरे विमानन क्षेत्र को बंधक बना ले? विपक्ष और विशेषज्ञों का आरोप है कि सरकार की नीतियां मोनोपॉली को बढ़ावा दे रही हैं, जिसका खामियाजा आम यात्री भुगत रहे हैं। इस संकट में पूर्व इंडिगो पायलट और यूट्यूबर गौरव तेनेजा (फ्लाइंग बीस्ट) के पुराने आरोप भी फिर से सुर्खियों में हैं, जो एयरलाइंस की सेफ्टी लापरवाही को उजागर करते हैं।
2017 में हिमाचल प्रदेश के शिमला में चुनाव दौरान पीएम मोदी ने कहा था, “हवाई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति हवाई जहाज में सफर करे, यही मेरा सपना है।” यह बात UDAN स्कीम के तहत हवाई यात्रा को सस्ता और पहुंच योग्य बनाने का वादा था। लेकिन 8 साल बाद, हवाई यात्रा सपना कम, बोझ ज्यादा लग रही है। इंडिगो की 60% से ज्यादा मार्केट शेयर वाली मोनोपॉली ने साबित कर दिया कि सरकार का सपना ‘एक कंपनी के सपने’ में बदल गया। DGCA के नए FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) भारत में फ्लाइट और ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के वर्तमान नियम DGCA द्वारा जनवरी 2024 में जारी किए गए संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (CAR Section 7, Series F, Part I) पर आधारित हैं, जिन्हें दो चरणों में लागू किया गया। पहला चरण 1 जुलाई 2025 से और दूसरा चरण 1 नवंबर 2025 से प्रभावी हुआ। इन नियमों के तहत पायलटों को प्रति सप्ताह कम से कम 48 घंटे का लगातार साप्ताहिक आराम, रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक की नाइट ड्यूटी की नई परिभाषा, प्रति सप्ताह अधिकतम 2 नाइट लैंडिंग, अधिकतम 13 घंटे तक की फ्लाइट टाइम (मल्टी-क्रू) और ड्यूटी टाइम को 16-20 घंटे तक सीमित किया गया है। हालांकि, 1 नवंबर 2025 से लागू इन सख्त नियमों के कारण देश भर में इंडिगो 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी । क्या यह संयोग है, या मोनोपॉली का दबाव?

अगर ‘हवाई चप्पल’ वाला सपना सच्चा होता, तो आज मुंबई-पटना का किराया 46,901 रुपये से ऊपर क्यों न पहुंच जाए? सरकार को इंडिगो पर दबाव डालना चाहिए था—या तो स्लॉट सरेंडर करें, या 300+ पायलट हायर करें। लेकिन झुकाव दिखा, क्योंकि इंडिगो को ‘अपना’ मान लिया गया। यह ‘मेक इन इंडिया’ का विडंबना है—जहां एक कंपनी सब कुछ ‘मेक’ कर रही है, और बाकी सब फंस रहे हैं।
गौरव तेनेजा के आरोप: एयरलाइंस की ‘सेफ्टी से खिलवाड़’ की पुरानी कहानी
DGCA ने एयर एशिया को SOP रिव्यू करने का ऑर्डर दिया। तेनेजा की जीत मानी गई, लेकिन कंपनी ने उन्हें टर्मिनेट कर दिया यह कहानी साबित करती है कि व्हिसलब्लोअर्स की आवाज दबाई जाती है, लेकिन सेफ्टी इश्यूज इग्नोर नहीं हो सकते। तेनेजा आज भी एविएशन एनालिसिस करते हैं, और कहते हैं: “सेफ्टी कोई ऑप्शन नहीं, जरूरत है।” अगर DGCA ने 2020 जैसे सख्त एक्शन लिया होता, तो आज का संकट कम होता।
मोदी सरकार को आत्मचिंतन करना चाहिए—’हवाई चप्पल’ वाला सपना मोनोपॉली के चप्पलों तले कुचल गया क्या? तेनेजा जैसे व्हिसलब्लोअर्स को संरक्षण दें, इंडिगो पर पेनल्टी लगाएं, और स्लॉट अन्य एयरलाइंस को दें। 6 महीने लगें, लेकिन सेफ्टी पहले। वरना, यह संकट बार-बार आएगा, और सपना सिर्फ मीम बनेगा।
सोशल मीडिया पर सरकार कि जमकर निंदा कि जा रही है। X पर एक यूजर ने लिखा “इंडिगो ने ब्रांड भारत और गवर्नेंस की बदनामी की है। सरकार इंडिगो जैसी कंपनी के सामने कितनी बेबस लाचार हो जाती है वह भी दिखा।यह बहुत ख़तरनाक संकेत है कि कोई कंपनी कैसे सिस्टम को बंधक बना सकती है”




