रसोई गैस खत्म होने से पहले कुछ जरूरी बातें, इन लोगों को नहीं मिलेगा गैस। कीमतें बढ़ने की आशंका

मुंबई ,12 मार्च 2026: वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध, खासकर अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही रुक गई है, जिससे भारत की तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आयात आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है और इसकी लगभग 62% जरूरत आयात से पूरी होती है, जिसमें सऊदी अरब, कतर जैसे देशों से आने वाली अधिकांश आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है।

सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए रिफाइनरियों को अधिकतम एलपीजी उत्पादन के आदेश दिए हैं और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति में कटौती कर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए घरेलू एलपीजी को प्राथमिकता दी है, जिससे व्यावसायिक सिलेंडरों (19 किलो) की उपलब्धता तेजी से घट गई है। ज़्यादातर रेस्तरां मालिकों का कहना है “हमारे पास महज़ 2-3 दिनों का स्टॉक बचा है।”

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। मुंबई में लगभग 20% होटल और रेस्तरां पहले ही बंद होने कि कगार पर है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह संकट रेस्तरां उद्योग को प्रतिदिन 1200-1300 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र 6.6 लाख करोड़ रुपये का है और लाखों लोगों को रोजगार देता है। कई रेस्तरां अब साधारण व्यंजन बना रहे हैं, जैसे सैंडविच, सलाद या ठंडे पेय, ताकि गैस बच सके। कुछ जगहों पर चाय भी बंद कर दी गई है।

वैकल्पिक संसाधनों की तलाश में संकट
गैस की कमी से बचने के लिए रेस्तरां और होटल इलेक्ट्रिक स्टोव, इंडक्शन कुकटॉप और अन्य वैकल्पिक उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन यहां भी समस्या है – प्रमुख निर्माताओं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे इंडिया मार्ट ( India Mart) पर इंडक्शन कुकटॉप “आउट ऑफ स्टॉक” दिख रहे हैं। जब हमारे संवाददाता ने एक इलेक्ट्रिक स्टोव बनाने वाली कंपनी से बात कि तो उन्होंने कहा “हम नई प्रोडक्शन कर रहे हैं, लेकिन अचानक बढ़ी इस डिमांड को पुरा करना इतना आसान नहीं है कारण मार्केट में सर्किट कंट्रोल बोर्ड कि भी कमी है।

पेट्रोल-डीजल की कमी की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो पेट्रोल और डीजल की कमी भी हो सकती है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है वर्तमान में क्रूड $100 के आसपास है। भारत ने रूस और अन्य स्रोतों से आयात बढ़ाने की योजना बनाई है और 60-70 दिनों के स्टॉक का दावा किया है। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन 25% बढ़ाने का आदेश दिया है। घरेलू सिलेंडर बुकिंग का अंतर 21 से 25 दिनों तक बढ़ा दिया गया है। मतलब 25 दिन से पहले आप दुसरी सिलेंडर कि बुकिंग नहीं कर पाएंगे, दो बुकिंग तारीख के बीच कम से कम 25 का अंतराल अनिवार्य है। वैकल्पिक स्रोतों जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस और पश्चिम अफ्रीका से आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध और लंबा चला तो अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा – मुद्रास्फीति बढ़ेगी, रोजगार प्रभावित होगा और खाद्य क्षेत्र में कीमतें आसमान छू सकती हैं।

यह संकट केवल ऊर्जा का नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था का है। रेस्तरां-होटल उद्योग, जो पर्यटन और रोजगार का बड़ा हिस्सा है, अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। सरकार ने व्यावसायिक क्षेत्र के लिए एक पैनल गठित किया है, लेकिन तत्काल राहत की जरूरत है। उपभोक्ताओं से अपील है कि अनावश्यक खपत कम करें और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करें।

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