पालघर (वानगांव), 19 जनवरी 2026: महाराष्ट्र के पालघर जिले के वानगांव क्षेत्र में सड़कों की बदहाल स्थिति अब कानूनी दायरे में पहुंच गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के प्रैक्टिसिंग एडवोकेट आशुतोष जे. दुबे ने ग्रामीणों की ओर से वानगांव ग्रामपंचायत को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें तत्काल सुधार की मांग की गई है।

एडवोकेट दुबे, जो पालघर जिले में भाजपा के लीगल एडवाइजर के रूप में भी जाने जाते हैं, ने नोटिस में साफ कहा है कि वानगांव की मुख्य सड़कों पर किया गया डामरीकरण (टारिंग) घटिया गुणवत्ता का, अधूरा और तकनीकी मानकों के खिलाफ है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई परतें और बिखरी गिट्टी के कारण आम नागरिकों, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दोपहिया/चारपहिया वाहन चालकों की जान को लगातार खतरा बना हुआ है।
नोटिस में विशेष जोर देते हुए कहा गया है कि मानसून के दौरान ये सड़कें जानलेवा साबित हो सकती हैं। यदि कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन, ग्रामपंचायत और ठेकेदारों पर होगी। एडवोकेट दुबे ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला जिलाधिकारी पालघर, सक्षम विभागों और न्यायालय के समक्ष ले जाया जाएगा।
एडवोकेट आशुतोष जे. दुबे ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई हैं:
- दोषी ठेकेदारों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाए
- पूरी सड़क की खुदाई कर फुल एस्फाल्ट रिसर्फेसिंग (पूर्ण एस्फाल्ट पुनर्निर्माण) किया जाए
- सड़क संकेतक (रोड साइनेज), डिवाइडर और स्ट्रीट लाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं
इस नोटिस की प्रतियां जिलाधिकारी पालघर, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग, तहसीलदार, वानगांव पुलिस स्टेशन और संबंधित ठेकेदार को भी भेजी गई हैं।

वानगांव के स्थानीय निवासियों में इस कानूनी पहल को लेकर काफी उत्साह और उम्मीद जगी है। लंबे समय से जर्जर सड़कों के कारण परेशान ग्रामीणों का कहना है कि अब शायद प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाएगा।
यह मामला ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति और जवाबदेही के मुद्दे को एक बार फिर उजागर करता है। आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है।



