बोइसर (पालघर), 2 दिसंबर 2025: महाराष्ट्र के बोइसर MIDC के वजन काटा क्षेत्र में रविवार देर रात एक बड़ी कार्रवाई में पुलिस और एपिका लैबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की संयुक्त टीम ने कंपनी का एक केमिकल से भरा टैंकर जब्त कर लिया। टैंकर को अवैध रूप से बाजार में केमिकल बेचने के इरादे से ले जाया जा रहा था। इस ऑपरेशन में कंपनी के कर्मचारी, ट्रक ड्राइवर और मारुति वजन काटा के मालिक सहित तीनों आरोपी हैं। यह घटना बोइसर MIDC क्षेत्र में केमिकल चोरी और अवैध डंपिंग के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है, जहां स्थानीय गांवों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, एपिका लैबोरेट्रीज के अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि कंपनी का एक कर्मचारी मिलीभगत करके केमिकल को चोरी-छिपे बाहर बेचने की साजिश रच रहा है। कंपनी ने तुरंत बोइसर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस और कंपनी की टीम ने रात में जाल बिछाया और निगरानी बढ़ा दी।
रात में एपिका लैबोरेट्रीज का टैंकर मारुति वजन काटा के पास पहुंचा। वहां पहले से मौजूद वजन काटा के मालिक, ट्रक ड्राइवर और कंपनी का कर्मचारी केमिकल को अवैध रूप से मार्केट में बेचने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने मौके पर दबिश देकर टैंकर जब्त कर दी। टैंकर को जब्त कर लिया गया है।प्रारंभिक जांच में यह उच्च गुणवत्ता वाला औद्योगिक ग्रेड केमिकल पाया गया, जिसकी बाजार मूल्य लाखों रुपये बताई जा रही है।
बोइसर MIDC में केमिकल माफिया का काला कारोबार: पर्यावरण और स्वास्थ्य पर संकट
यह घटना अकेली नहीं है। बोइसर MIDC क्षेत्र में केमिकल्स की अवैध खरीद-फरोख्त और डंपिंग का गोरखधंधा बड़े स्तर पर फल-फूल रहा है। स्थानीय सूत्रों और गांव वालों के अनुसार, कई बड़े चेहरे इसमें लिप्त हैं, जो कंपनियों से निकले केमिकल्स को बोइसर के आसपास के ग्रामीण इलाकों, जंगलों, गटरों और अब तो बोरवेल्स में भी डंप करवा रहे हैं। इन ‘केमिकल माफिया’ के कारण MIDC के आसपास के गांवों की जमीन बंजर हो चुकी है, भूजल दूषित हो गया है, जो न पीने लायक बचा है न खेती के लिए। गांव वालों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये केमिकल स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं—कैंसर, त्वचा रोग और जन्म दोष जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “इतना बड़ा कारोबार बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं। MIDC अधिकारी लाखों रुपये लेकर अवैध डंपिंग की इजाजत दे देते हैं।” फार्मा कंपनियां ट्रीटमेंट के खर्च से बचने के लिए माफिया को पैसे देकर केमिकल सौंप देती हैं, जो फिर इन्हें डंप कर देते हैं।
पिछले वर्षों में बोइसर पुलिस ने कई बार अवैध डंपिंग के टैंकर रंगे हाथों पकड़े हैं, लेकिन कार्रवाई सतही रहती है।
यह मामला बोइसर MIDC क्षेत्र में औद्योगिक केमिकल की चोरी और काला बाजारी के खिलाफ पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता है, लेकिन इससे बड़ा सवाल उठता है—केमिकल माफिया के नेटवर्क को कब तोड़ा जाएगा? क्षेत्र में कई फार्मा और केमिकल यूनिट्स होने के कारण ऐसी साजिशें पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही हैं।




