रिपोर्टकार्ड न्यूज, नई दिल्ली 11 नवंबर 2025
दिल्ली के ऐतिहासिक रेड फोर्ट के पास सोमवार शाम हुए कार विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई, जिनमें से एक थे दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (डीटीसी) के बस कंडक्टर अशोक कुमार। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के रहने वाले अशोक अपनी आठ सदस्यीय परिवार की जिम्मेदारी अकेले उठाते थे। उनकी मौत से पूरा परिवार सदमे में है और अमरोहा में शोक की लहर दौड़ गई है।
अशोक पुरानी दिल्ली रूट पर क्लस्टर बस में कंडक्टर का काम करते थे। दिन में बस ड्यूटी और रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करके वे परिवार का पेट पालते थे। उनकी पत्नी और चार बच्चे—तीन बेटियां और एक बेटा—दिल्ली के जगतपुरी इलाके में रहते हैं, जो विस्फोट स्थल से करीब 15 किलोमीटर दूर है। उनकी मां सोमवती गांव में बड़े बेटे सुभाष के साथ रहती हैं, लेकिन सुभाष की तबीयत अक्सर खराब रहने से घर की सारी जिम्मेदारी अशोक पर थी।
अशोक के चचेरे भाई पप्पू ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया, “मैंने पीड़ितों की लिस्ट में उनका नाम देखा तो हैरान रह गया। फोन करके कन्फर्म किया। वे इस रूट से रोज आते-जाते थे। उनकी बाइक भी अब गायब है।” पप्पू के मुताबिक, अशोक या तो ड्यूटी से लौट रहे थे या कहीं जा रहे थे, जब यह हादसा हुआ।
विस्फोट में घायलों का इलाज एलएनजेपी अस्पताल में चल रहा है, जहां परिजन अपने अपनों की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए। एक बुजुर्ग व्यक्ति लोकेश कुमार गुप्ता नाम के अपने रिश्तेदार को ढूंढ रहे थे। उन्होंने बताया, “हम दोनों सर गंगा राम अस्पताल से शाम को निकले थे। लोकेश चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पर उतरे, जहां अशोक उन्हें रिसीव करने वाले थे।” दुर्भाग्य से अशोक की मौत हो गई, जबकि लोकेश अब भी लापता हैं।
यह विस्फोट दिल्ली में सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। घायलों के परिजनों ने कहा कि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पुलिस जांच जारी है और लाइव अपडेट्स का इंतजार है।




