मनोर (पालघर), ८ नवंबर २०२५ (रिपोर्टकार्ड न्यूज डेस्क): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आद्यक्रांतिकारी राघोजी भांगरे की २२०वीं जयंती आज मनोर तालुका स्थित कार्यालय में स्थानीय नेता संतोष जनाठे के नेतृत्व में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर राघोजी भांगरे के शौर्य गाथा का स्मरण किया गया और आदिवासी समाज के युवाओं को प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
राघोजी भांगरे महाराष्ट्र के महादेव कोली समुदाय के एक निर्भीक क्रांतिकारी थे। उनका जन्म ८ नवंबर १८०५ को अकोले तालुका के देवगाव में माता रमाबाई व पिता रामजी भांगरे के घर हुआ था। मात्र १० वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ हथियार उठाया और १८२६ से १८४८ तक अहमदनगर, नाशिक, पुणे व सातारा जिलों में कई विद्रोह खड़े किए। उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों को भगाया, खजाना लूटा और संघर्ष किया। २ मई १८४८ को वे शहीद हुए, लेकिन उनका पराक्रम आज भी पोवाड़ों में गाया जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने उनकी स्मृति में ठाणे जेल व चौकों का नाम उनके नाम पर रखा है।
कार्यक्रम की झलक: प्रेरणा और अभिवादन
मनोर स्थित संतोष जनाठे के कार्यालय में सुबह १० बजे कार्यक्रम शुरू हुआ। संतोष जनाठे, जो स्थानीय प्रमुख नेता व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि के रूप में जाने जाते हैं।“राघोजी भांगरे आदिवासी समाज के प्रेरणास्रोत हैं। आज के युवाओं को उनके शौर्य से सीखना चाहिए और सामाजिक न्याय के लिए लड़ना चाहिए,” जनाठे ने मार्गदर्शन किया।




