सपनों का शहर या समस्याओं का अंबार? बोईसर में विकास की रफ्तार पर लगा ‘अतिक्रमण’ का ब्रेक

बोईसर (पालघर) दिनांक: 22 दिसंबर, 2025

बोईसर: पालघर जिले का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बोईसर आज अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लाखों की आबादी और सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों वाले इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का अकाल पड़ा है। जर्जर सड़कें, नदारद पार्किंग और अतिक्रमण की समस्या ने स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। सबसे भयावह स्थिति बोईसर सब्जी मंडी की है, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे का केंद्र बन सकती है।

बोईसर, जो पालघर जिले में स्थित है, अपनी तेजी से बढ़ती आबादी और विभिन्न कंपनियों के कारण जाना जाता है। लेकिन विकास की इस रफ्तार में बुनियादी ढांचे की अनदेखी हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़कें जर्जर हैं, वाहनों की पार्किंग के लिए कोई जगह नहीं है, और बच्चों व बुजुर्गों के लिए पार्क की सुविधा न के बराबर है। “हमारी आबादी लाखों में है, लेकिन सुविधाएं दशकों पुरानी हैं,” एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। ग्राम पंचायत पर आरोप है कि वह इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही, जबकि लोग पानी और नाली की समस्या से जूझ रहे हैं।   

सबसे गंभीर समस्या बोईसर की सब्जी मंडी में देखी जा रही है। यह मंडी घनी आबादी के लिए एकमात्र छोटा बाजार है, जो पहले से ही काफी संकरी और सीमित जगह वाली है। लेकिन अब दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं ने गलियों पर भी कब्जा कर लिया है। दुकानों के बाहर सब्जियां और सामान रखकर वे न केवल ग्राहकों के आने-जाने में बाधा पैदा कर रहे हैं, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी जोखिम में डाल रहे हैं। संकरी गलियों के कारण अक्सर भीड़ बढ़ जाती है, जिसका फायदा चोर और पॉकेटमार उठाते हैं। “भीड़ में हमेशा पर्स, मोबाइल और वॉलेट चोरी हो रहे हैं,” एक नियमित ग्राहक ने शिकायत की।

मंडी में प्रवेश के सभी रास्तों पर अतिक्रमण हो चुका है, जो एक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। अगर आग लगने या भगदड़ जैसी कोई घटना हुई, तो हजारों लोगों की जान बाहर निकलने के रास्ते न होने के कारण खतरे में पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बचाव कार्य भी मुश्किल हो जाएगा। “यह एक टाइम बम की तरह है, जो कभी भी फट सकता है,” एक सामाजिक कार्यकर्ता ने चेतावनी दी।

ग्रामपंचायत पर मुकदर्शक बनने का आरोप लग रहा है। कुछ महीने पहले प्लास्टिक पर बैन लगाया गया था, लेकिन कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ दिखावा था। “कार्रवाई केवल वसूली के लिए होती है, असल में कोई बदलाव नहीं आता,” एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि अतिक्रमण हटाया जाए और सुविधाओं में सुधार किया जाए।

यह स्थिति बोईसर के विकास मॉडल पर सवाल उठाती है। जहां एक ओर इंडस्ट्रीज रोजगार दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी जरूरतों की अनदेखी से असंतोष बढ़ रहा है। अब सवाल यह है कि ग्राम पंचायत किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगी या तत्काल कार्रवाई करेगी? स्थानीय प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह इन मुद्दों पर ध्यान दे और बोईसर को एक सुरक्षित और सुविधाजनक जगह बनाए।

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