विवादास्पद बयान से भड़का आक्रोश: IAS संतोष वर्मा का ‘ब्राह्मण बेटी दान’ वाला बयान,पुराने आपराधिक रिकॉर्ड पर सवाल

इंदौर, 26 नवंबर 2025 (@reportcard): वर्षों से आरक्षण ने देश को दो हिस्सों में बांट रखा है, लेकिन इस मुद्दे को IAS संतोष वर्मा ने अपने एक बेहद निंदनीय भाषण से फिर से हवा दे दी है। एक सभा को संबोधित करते हुए संतोष वर्मा ने ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान दें, या ब्राह्मण लड़की उनके लड़के से अनैतिक शारीरिक संबंध बनाने की बात भी कही।

इस बयान के बाद संतोष वर्मा के खिलाफ बड़ी संख्या में विरोध हो रहा है। रिपोर्टकार्ड के संवाददाता ने जब कुछ दलितों से इस पर बात की तो दलित समुदाय के लोगों ने ना सिर्फ इसे विवादित और अपमानजनक टिप्पणी बताया बल्कि यह भी कहा, “ब्राह्मण समाज हमारे लिए पुजनिय है।” ऐसे वक्तव्य ना सिर्फ ब्राह्मण समाज की महिलाओं का अपमान है, बल्कि एक अपराध भी है।

विवादित बयान के बाद संतोष वर्मा माफी मांगते फिर रहे हैं, लेकिन इस बयान को लेकर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने केस दर्ज करने की बात कही है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे ब्राह्मण महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

संतोष वर्मा का आपराधिक इतिहास: प्रमोशन के लिए फर्जीवाड़ा, शोषण के आरोप

बताते चलें कि आईएएस संतोष वर्मा एक आदतन अपराधी है। अपने प्रमोशन के लिए फर्जी कागजात तैयार करने और जज की फर्जी हस्ताक्षर करने के जुर्म में वे जेल जा चुके हैं। 27 जून 2021 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

यही नहीं, 2016 में एक महिला ने इंदौर के लसूड़िया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि संतोष वर्मा ने शादी का वादा किया, लिव-इन में रखा। महिला का शोषण किया। लेकिन बाद में पता चला कि वे पहले से शादीशुदा हैं। यह बात उन्होंने छुपाई। बाद में इस ठरकी आईएएस के इश्क के और कई चर्चे भी सरेआम हुए। ऐसे अनेकों आपराधिक मामलों में नामजद होने के बाद भी संतोष वर्मा खुल्ले सांड की तरह कैसे घूम रहे हैं? यह सवाल अब समाज के हर वर्ग में उठ रहा है।

आंबेडकरवाद के नाम पर हिंदू धर्म का अपमान: बढ़ते विवादों पर सवाल

लेकिन अब सवाल यह है कि आखिर अचानक से कुछ सालों में आंबेडकरवाद के नाम पर हिंदू धर्म और देवी-देवताओं के अपमान इतनी आम क्यों होती जा रही है? सरकार इन लोगों पर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान न केवल सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करते हैं, बल्कि कानूनी रूप से भी दंडनीय हैं।

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